एक दक्षिण अफ्रीकी लक्जरी ट्रavel कंपनी अंटार्कटिका की यात्रा के लिए ऐसे जेट विमानों का इस्तेमाल करने वाली है जो आंशिक रूप से उपयोग किए गए खाने के तेल से बने एविएशन ईंधन पर चलेंगे। यह कदम दुनिया के सबसे दूरस्थ महाद्वीप तक टिकाऊ ईंधन वाले व्यावसायिक उड़ानों की ओर एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
वाइट डेज़र्ट नामक कंपनी पहले भी अंटार्कटिका के लिए प्रीमियम एक्सपेडिशन ट्रावल का संचालन करती रही है। अब यह कंपनी कैनप टाउन और अंटार्कटिका के बीच नियमित उड़ानें शुरू करने वाली है। इन उड़ानों के लिए उपयुक्त ईंधन सासोल नामक दक्षिण अफ्रीकी ऊर्जा और रसायन कंपनी द्वारा आपूर्ति किया जाएगा।
सासोल को कोयले और प्राकृतिक गैस से सिंथेटिक ईंधन बनाने की तकनीक में लंबे समय से माहिर माना जाता है। उपयोग किए गए खाने के तेल को एविएशन ईंधन में बदलना इस क्षेत्र में नई दिशा है। हालांकि किन उड़ानों में कितने प्रतिशत बायोफ्यूल मिलाया जाएगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इससे पर्यटन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक ठोस पहल देखी जा रही है।
ये उड़ानें मुख्य रूप से उच्च-बजट यात्रियों के लिए हैं। वाइट डेज़र्ट के अनुसार सफर की कीमत लगभग 16,500 डॉलर से लेकर 1,20,000 डॉलर प्रति व्यक्ति तक है, जो भूमि पर बुकिंग और सुविधाओं के स्तर पर निर्भर करता है। कंपनी अंटार्कटिका में लक्जरी कैम्प्स और बर्फ की रनवे पर सेवाएं प्रदान करती है।
विश्व भर में एयरलाइनों के लिए पारंपरिक जेट ईंधन के विकल्पों की तलाश एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अंटार्कटिका जैसी नाजुक पर्यावरणीय स्थलों तक पहुँच बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें टिकाऊ बनाने की कोशिश भी पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि बढ़ती मानवीय गतिविधियां महाद्वीप के बर्फ और जीव-जंतुओं को खतरा बन सकती हैं।



